बेकरारी की एक हद गुज़ारदी हमने इस तरह
छटपटाये मछली पानी के बिना जिस तरह
वो न आये तो और तो बात नहीं होगी कोई
जान वैसे ही ले गए है वो यहांसे चले जा कर
अरमां उनको देखनेका इस तरह जले है दिलमे
पतंगे के लिए शमा तपिशसे छटपटाये है जैसे
बयां करे कैसे दिल का हाल आये दिन उनको
हररोज़ की ये एक सी दास्ताँ हम सुनाये कैसे
अर्चिता दीपक
No comments:
Post a Comment