दबे दबे से जज़्बात
सहमी सहमी सी साँस है
सुन्न कुछ अहेसास से
बेहोश सी ज़िन्दगी है
किसीका आना मुक्करर नहीं
न किसीके जाने से है शिकवा
फिर भी जान है, मसरुफी है
जारी है सांसो का गिनना
यही उम्मीदसे कि
....होशमे आएगी ज़िन्दगी !
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