Saturday, 3 March 2018

हिंदी, रूह से


उन्होंने पास आ कर

हमारी बिन्दीका ज़िक्र किया

लाल बिंदी सा रंग

फ़ैल गया तब हमारे गालों पे ...

घने बालोंका  ज़िक्र किया

वो भी लहराये दुबारा

उस समय हमारे शानों पे

हमारी आँखका काजल ले के

टीका लगाया जब उन्होंने

शर्म से पानी पानी हुए  हम

उन लम्हों में .....

फिर बात आई तो

गहनेकी ,  दुपट्टेकी

और हुस्न की भी

वो फ़िदा थे हुस्नपे

हम उनके फनपे

अच्छा हुआ

जल्द समझ आ गया

हमारी रूहको

कि

वो इन सब सामानसे

बेइन्तहा प्यार करते थे ......
         अर्चिता दीपक

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