Friday, 13 April 2018

હિન્દી

हमें शोर बहुत अच्छा लगता है,
     और हमें शांतिकी खोज करनी है।

हमें आवश्यकता से ज्यादा धन कमाना है,
हमें समझना है, ये हम कभी भी किसी तरह गँवा सकते है।

हमें  चाहिए कि जीवनमें सब उपलब्धियां हांसिल हो,
हमें पता है ये दौड़ सेहतको छीन लेती है।

हमें चाहिए कि प्रेम बिनशरती मिले,
अपेक्षा नहीं पूरी होने पर हम ही गमगीन हो जाते है।

एक महाशक्ति को मानना हमारे लिए सुकुन बन जायेगा,
पर हम हैं कि
पथ्थरके बूतमें ढूंढते है इसे, आवाज देते रहते है।

हमारी अंदर छूपा भगवान हमसे ही कितना परेशान रहेता होगा?
      अर्चिता दीपक

No comments:

Post a Comment