इश्के दरियामे ऐसे डूबे
अपनी साँसोके मोहताज हो गए
संभाल हमको अये ज़िन्दगी !
खुद अपने नामसे बिछड़ न जाये......
अपने आपसे ऐसे उलज़े
अपनी जानके दुश्मन बन गए
संभाल हमको अये रुतबा
खुद अपनी नज़रोंसे गिर न जाये ......
अपने आपसे नाउम्मीदी है
गैर से क्यों कोई शिकवा करे
संभाल हमको अये खुदी
इत्तिमादि हमें साथ लेके चले .......
अर्चिता दीपक पंड्या
No comments:
Post a Comment